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कल्कि तू कहाँ है : स्वामी प्रणवानन्‍द सरस्वती की जीवन गाथा

पूज्य गुरुदेव ने इस कलियुग में भी सन्यास लेकर विषम साधना की । 12 वर्ष एक तपोवन के एकांत में रह कर तपस्या की । उस तप के फलस्वरुप उनमें कुण्डलिनि शक्ति का जागरण हुआ । उनमें वेदों की कथित काल अग्नि का उदय हुआ । इस उदय के फलस्वरुप उनके मन में सोमरस की वर्षा हुई । उन्हें अमृत आनन्द के अनुभव हुए । कालाग्नि के उदय से वह काल पुरुष बने । उनमें पुनरोत्थान की विष्णु चेतना का जन्म हुआ । उनमें अपार सम्मोहन शक्ति और प्रखर बुद्धि का उदय हुआ । नर से वह नारायण हुए । अगर उस लगन से हम सब साधना करें तो हम भी अपने आप को नर से उठाकर नारायण बना सकते हैं । यह स्वाभाविक उत्कृष्टि का मार्ग है । इसी ने हमें खर से नर बनाया । यही हमें नर से नारायण बना देगा । हमारे पूज्य गुरुदेव स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती वस्तुतः उसी विष्णु चेतना के प्रतिनिधि थे । वह काल पुरुष थे । वह पर्यावरण के समर्थक थे । वह चेतना विज्ञान के प्रकाण्ड पंडित थे ।

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Kalki tu kaha hai: Swami Prannvanand ki jeevan gatha’ book written by Major General G.D. Bakshi talks about the life of Swami Prannvanand. He spent 12 years of his life in the forest and how his labour paid off. A book that will change your views towards life as you will learn a lot from the life of Swamj Pra nvanand. Now get a copy of ‘Kalki tu kaha hai’ at Garuda books.

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